छिंंदवाड़ा जिले के विकासखंड मुख्यालय जुन्नारदेव से 30 किलोमीटर की दूरी पर ग्राम पंचायत के ग्राम ताल खमरा में तथा छिंदवाड़ा आमला रेल मार्ग में नवेगांव रेलवे स्टेशन से लगभग 6 किलोमीटर दूर स्थित ताल खमरा में भूतों का मेला आयोजित होता है।
ताल खमरा में मेला स्थल पर तालाब के समीप मालन माई का प्रसिद्ध मंदिर स्थित है।
प्रेत बाधा मुक्ति का यह भूतों का मेला दीपावली के पश्चात देवउठनी ग्यारस से 15 दिवस तक लगता है। भूतों का मेला सदियों से ऐसा ही लग रहा है।
भूतों का मेला का प्रबंध वर्तमान में मंदिर तथा ग्राम पंचायत समिति की देखरेख में होता है। अपराध नियंत्रण की दृष्टि से पुलिस विभाग व्यवस्था को नियंत्रण करने हेतु सहयोग करते हैं।
ताल खमरा में लगने वाले भूतों के इस मेले की विशेषता यह है कि यहां प्रेत बाधा से परेशान और मानसिक रूप से विक्षिप्त लोगों का उपचार तांत्रिक, ओझा एवं पडिहार अपनी मंत्र शक्ति से करते हैं।
सबसे पहले मेला स्थल पर स्थित तालाब में तांत्रिक, ओझा व पडिहार प्रेत बाधा ग्रसित मरीज को स्नान करवाते हैं।
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इसके बाद मंदिर के समीप स्थित विशाल वटवृक्ष दैय्यत बाबा के नीचे ले जाकर तंत्र मंत्रोच्चार कर धागे से बांधकर तांत्रिक पूजा कर प्रेत बाधा दूर करते हैं।
इसके बाद पास में बने मालन माई मंदिर में जाकर माई की पूजा अर्चना की जाती है। ऐसी मान्यता है कि मालन माई के दर्शन से प्रेत बाधा से मुक्ति मिलती है मरीज ठीक हो जाता है।
इस भूतों का मेला में ग्रामीण आदिवासी समाज के अतिरिक्त अन्य समाज के लोग भी यहां अपना व अपने परिवार का उपचार करवाते हैं।
यहां पर छिंदवाड़ा, बैतूल, सिवनी आदि अन्य जिलों के अलावा अन्य प्रदेशों से भी प्रेत बाधा पीड़ित परिवारों को आते देखा गया है।
इन 15 दिन में भूतों का मेला में लगभग 40-50 हजार लोग सम्मिलित हो जाते हैं।
आज के इस वैज्ञानिक युग में भी आस्था और अंधविश्वास का यह भूतों का मेला बहुत ही अद्भुत लगता है। जहां असंख्य लोग अपनी मनोकामना पूर्ण करने प्रतिवर्ष आते हैं एवं भूत प्रेतों से मुक्ति पाते हैं।
जिसका प्रशासन समर्थन नहीं करता है परंतु आज भी कुछ ऐसे अनसुलझे पहलू है। जिन्हें लोग सदियों से मानते चले आ रहे हैं।
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