छिंदवाड़ा जिले के अति प्रसिद्ध सिद्ध धामों में एक और सिद्ध धाम है, ग्राम निमोटी का नागदेव मंदिर। वहींं कुछ लोग इसे धन गौरी बाबा मंदिर भी कहते हैं।
"नागदेव मंदिर मोरखा, जिला बैतूल" अथवा "धनगौरी बाबा मंदिर मोरखा, जिला बैतूल" के नाम से यह सिद्ध स्थान प्रसिद्ध है।
यह बैतूल जिले व महाराष्ट्र के श्रद्धालुओं में ज्यादा प्रसिद्ध है क्योंकि यह छिंदवाड़ा बैतूल जिले की सीमा पर स्थित है।
बैतूल जिले के मोरखा गांव से लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। परंतु वास्तव में यह प्रसिद्ध सिद्ध धाम, नागदेव मंदिर, छिंदवाड़ा जिले के विकासखंड जुन्नारदेव की ग्राम पंचायत ढाकरवाड़ी के ग्राम निमोटी में स्थित है।
यह निमोटी ग्राम, छिंदवाड़ा बैतूल की सीमा बनाने वाली बेल नदी (Bel River) के किनारे, जिला छिंदवाड़ा की सीमा में स्थित है।
जिला मुख्यालय छिंदवाड़ा से सड़क मार्ग द्वारा निमोटी का यह प्रसिद्ध नागदेव मंदिर 81 किलोमीटर दूर स्थित है।
विकासखंड मुख्यालय जुन्नारदेव से नागदेव मंदिर की दूरी 50 किलोमीटर है। तथा नवेगांव से लगभग 17 किलोमीटर दूर है।
छिंदवाड़ा बैतूल सड़क मार्ग, पर दुनावा ग्राम से दाहिनी ओर 23 किलोमीटर दूर निमोटी ग्राम में नागदेव मंदिर स्थित है।
जिला मुख्यालय बैतूल से 83 कि.मी. तथा मुलताई से 34 कि.मी. की दूरी पर नागदेव मंदिर निमोटी स्थित है।
नागदेव मंदिर निमोटी पर नाग देवता की स्वयंभू मूर्ति है। यह स्वयंभू मूर्ति अत्यधिक सिद्ध मानी जाती है।
इन्हें यहां धनगौरी बाबा के नाम से भी जाना जाता है। गाय चराने वाले माली द्वारा धनगौरी बाबा का नाम दिया गया।
नागदेव मंदिर निमोटी पूर्व में यहां नाग देवता के जोड़ी से अधिकांश लोगों को साक्षात दर्शन हुए हैं। प्रार्थना करने वाले की प्रार्थना द्वारा मांगी गई इच्छा पूर्ण हुई।
नागदेव का यह स्थान कितने वर्ष प्राचीन है, यह कोई भी नहीं बता पाता है। परंतु जब से पचमढ़ी की नागद्वारी यात्रा प्रारंभ हुई होगी, तब से ही यहां भी पूजन की परंपरा रही है।
पूजा हेतु बेलपत्र, दूध, फूल, फूलमाला, मिठाई, भोग आदि चढ़ाते हैं, कपूर जलाते हैं। कुछ लोगों द्वारा प्रायः पूजन में मुर्गे, बकरे आदि की बलि भी प्रायः अधिकांशतः दी जाती है।
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आसपास क्षेत्र के ग्रामों में निमोटी के इस नागदेव मंदिर की इतनी अधिक मान्यता है कि किसी भी समाज के लोगों के यहां वैवाहिक कार्य होता है, तो विवाह के पश्चात नवयुगल दंपत्ति यहां नागदेव मंदिर में माथा टेक कर आशीर्वाद लेते हैं। और अपने वैवाहिक जीवन की शुरुआत करते हैं।
नागदेव मंदिर निमोटी में किसी ने दोपहिया या चौपहिया नए वाहन खरीदा है, तो उसे भी यहां लाकर पूजन किया जाता है, एवं नाग देवता को प्रसाद चढ़ाया जाता है।
नागदेव मंदिर निमोटी में आसपास के ग्रामीण अच्छी फसल, संतान प्राप्ति, बच्चों की शादी, परिवार की खुशहाली, रोग मुक्ति आदि अनेकानेक मनोकामना के साथ यहां मन्नत मांगने आते हैं। आसपास के ग्रामीण साल में एक बार पूजा अर्चना करने अवश्य आते हैं।
नाग देवता के इस सिद्ध धाम से श्रद्धालुओं की आस्था अनुसार उनकी मनोकामनाएं पूर्ण भी होती है।
नाग पंचमी के समय होशंगाबाद जिले की पचमढ़ी की प्रसिद्ध नागद्वारी यात्रा करने वाले श्रद्धालु इस नागदेव मंदिर को पहली पायरी मानकर, अपनी नागद्वारी यात्रा यहीं से प्रारंभ करते हैं। इस अवधि में महाराष्ट्र से आने वाले श्रद्धालुओं की प्रतिदिन हजारों में रहती है।
श्रावण शुक्ल पंचमी अर्थात नाग पंचमी में यहां नागदेव मंदिर में बहुत बड़ा मेला भरता है।
नाग पंचमी के दिन नागदेव की विशेष पूजा, अर्चना, आरती की जाती है। यहां सर्वाधिक श्रद्धालु नाग पंचमी में आते हैं। इस दिन देर रात्रि तक पूजा-अर्चना चलती रहती है। वैसे तो पचमढ़ी का नागद्वारी मेला 10 दिन पूर्व प्रारंभ हो जाता है।
नागदेव मंदिर निमोटी में महाराष्ट्र के श्रद्धालुओं की भीड़ नाग पंचमी के 10 दिन पूर्व से ही प्रारंभ हो जाती है। श्रद्धालु नागदेव मंदिर निमोटी जो कि पहली पायरी है, से ही अपनी नागद्वारी पचमढ़ी की यात्रा प्रारंभ करते हैं।
रक्षाबंधन में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां नागदेव मंदिर निमोटी में नाग देवता को रक्षा सूत्र बांधने आते हैं। वैसे तो वर्ष भर रविवार एवं बुधवार को पूजन अर्चन करने, मुर्गा एवं बकरे की बलि हेतु श्रद्धालुओं का आना लगा रहता है। परंतु चैत्र माह में पूरे माह मेला सा लगा रहता है।
श्रद्धालु श्रद्धानुसार प्रसाद चढ़ाते हैं। चैत्र माह में प्रतिदिन सैकड़ों मुर्गे, बकरे की बलि श्रद्धालुओं द्वारा दी जाती है।
पोला त्यौहार के बाद ऋषि पंचमी के अवसर पर, आसपास के ग्राम वासियों के सहयोग से, एक विशाल अखाड़ा प्रतियोगिता का आयोजन निमोटी ग्राम में नागदेव मंदिर क्षेत्र में किया जाता है। जिसमें विजयी होने वाले पहलवानों को नगद पुरस्कार इत्यादि से पुरस्कृत किया जाता है।
नागदेव मंदिर, निमोटी का यह सिद्ध स्थल, छिंदवाड़ा जिले के सर्वाधिक तीन सिद्ध मंदिरों में से एक है। जहां प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु दर्शन पूजन हेतु पहुंचते हैं।
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