शंकर वन मेला, छिंदवाड़ा जिले के बिछुआ का बहुत प्रसिद्ध मेला है। यह मेला प्रतिवर्ष लगता है।
शंकर वन मेला स्थल बिछुआ से लगभग 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
शंकर वन मेला प्रतिवर्ष लगने का बहुत ही रोचक तथ्य है कि यहां एक शिवलिंग की स्थापना की गई थी। जो उस समय सन् 1967 ईस्वी में पुलिस विभाग में कार्यरत पुलिस इंस्पेक्टर को भ्रमण के दौरान ग्राम कुरई के समीप शिवलिंग के रूप में मिली थी।
इंस्पेक्टर ने समीप ही जंगल में रमणीय स्थल पर मंदिर बनवा दिया। और शिवलिंग की पूजा-अर्चना कर प्रतिष्ठापना करवा दीया गया।
प्रतिवर्ष मकर संक्रांति पर धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन मंदिर प्रांगण में प्रारंभ किया जाने लगा। इस प्रकार धीरे-धीरे भगवान शिव के प्रति अगाध श्रद्धा स्वरूप यह स्थल शंकर वन मेला प्रसिद्धि प्राप्त करने लगा।
यह शंकर वन मेला प्रतिवर्ष मकर संक्रांति से सात दिवस पूर्व प्रारंभ हो जाता है तथा मकर संक्रांति 14 जनवरी तक चलता है।
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वर्तमान में शंकर वन मेले में प्रतिदिन लगभग 20,000 से अधिक श्रद्धालु पहुंचते हैं। जो भगवान शिव से अपनी मनोकामना की प्रार्थना करते हैं।
यहां शंकर वन, मेला अवधि में प्रतिदिन 30 से 50 परिवार भगवान सत्यनारायण की कथा करवाते हैं। भंडारा भी करवाते हैं। सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन भी श्रद्धालु भक्तों को भाव विभोर कर भक्ति रस में डुबो देता है।
अंतिम दिन भंडारे के साथ ही दही लाही का प्रसाद वितरित किया जाता है। शंकर वन मेला समिति मेले की व्यवस्थाओं का प्रबंधन करती है।
शंकर वन मेला में सभी प्रकार की दुकानें जैसे रेडीमेड कपड़ा, सौंदर्य प्रसाधन, पूजा सामग्री, प्रसाद, मिठाई, खिलौने, बर्तन, सोने एवं चांदी की दुकाने, खेल तमाशा करतब वाले भी आते हैं।
छिंदवाड़ा, सिवनी, उमरानाला, चौरई, सौसर आदि के व्यापारी 7 दिनों के लिए पहले से ही दुकान की जगह मेला प्रबंधन समिति से प्राप्त कर अपने तंबू व टेंट लगा लेते हैं।
शंकर वन मेले में प्रतिवर्ष श्रद्धालु की दुकानों की संख्या बढ़ने के कारण मेला क्षेत्र का दायरा भी विस्तृत होता जा रहा है। शंकर वन मेला समिति ग्राम पंचायत राजस्व विभाग पुलिस विभाग एवं वन विभाग के आपसी सहयोग से मेले की सुगम व्यवस्था बनाई जाती है।
इसी प्रकार शंकर वन मेला श्रद्धालुओं के आने से श्रद्धा पूर्वक प्रतिवर्ष लगता है।
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